पंडरिया :- छत्तीसगढ़ के पंडरिया स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल शक्कर कारखाना इस समय गहरे वित्तीय और प्रबंधन संकट से गुजर रहा है। हालात ऐसे हैं कि पेराई सत्र शुरू होने के दो महीने बाद भी किसानों को एक रुपया तक का भुगतान नहीं हो पाया है। नतीजतन किसान कारखाने से दूरी बना रहे हैं और गन्ना गुड़ उद्योग की ओर मोड़ रहे हैं, जहां उन्हें नकद भुगतान मिल रहा है।
कारखाने ने 21 नवंबर 2025 को पेराई सत्र की शुरुआत तो कर दी, लेकिन अब तक की प्रगति इसकी बदहाली को उजागर करती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 6918 किसानों का मात्र 1,07,720 मीट्रिक टन गन्ना पेराई किया जा सका है। इससे 1,13,714 क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ है, जबकि रिकवरी मात्र 10.94 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो औद्योगिक मानकों के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।
सबसे गंभीर स्थिति किसान भुगतान को लेकर है। कारखाने द्वारा गन्ने की अनुमानित कीमत जहां करीब 330 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है, वहीं क्षेत्र के गुड़ उद्योग 455 रुपये प्रति क्विंटल तक नगद भुगतान कर रहे हैं। यही कारण है कि किसान शक्कर कारखाने में गन्ना देने को तैयार नहीं हैं और खुले बाजार का रुख कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि कारखाने की स्थापित पेराई क्षमता के अनुरूप न तो गन्ना उपलब्ध हो पा रहा है और न ही पेराई हो रही है। क्षमता होते हुए भी उसका पूरा उपयोग न होना सीधे तौर पर वित्तीय कुप्रबंधन, कमजोर योजना और किसानों के प्रति उदासीन रवैये की ओर इशारा करता है।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो आने वाले दिनों में कारखाने की पेराई और घटेगी, जिससे न सिर्फ किसानों को नुकसान होगा बल्कि क्षेत्र की चीनी उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
अब सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और कारखाना प्रबंधन समय रहते हस्तक्षेप कर किसानों का भरोसा लौटा पाएंगे, या फिर सरदार वल्लभभाई पटेल शक्कर कारखाना कागजों की क्षमता और ज़मीनी हकीकत के बीच फंसा एक और असफल सहकारी मॉडल बनकर रह जाएगा।
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