कवर्धा। जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई बांधों में जलभराव बढ़ गया है। इसी बीच सहसपुर लोहारा विकासखंड के बेलहरी गांव स्थित करीब 50 वर्ष पुराने बांध की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। बांध की पार से लगातार पानी का रिसाव होने के कारण आसपास के ग्रामीणों और किसानों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध की मजबूती को लेकर किए गए दावों की पोल बारिश ने खोल दी है।
जानकारी के अनुसार बेलहरी बांध की मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक मार्च-अप्रैल में बांध की मरम्मत का कार्य कराया गया, लेकिन बारिश शुरू होने के कुछ ही समय बाद बांध की पार से पानी का रिसाव होने लगा। ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गर्मी के दौरान बांध सूखने के बाद अंदरूनी हिस्से से मिट्टी के बजाय मुरूम निकाला गया और उसका उपयोग मरम्मत में किया गया। उनका आरोप है कि बांध की अंदरूनी पार में पर्याप्त मिट्टी नहीं डाली गई, बल्कि बाहरी सतह पर ही सामग्री डालकर मरम्मत पूरी कर दी गई।
बेलहरी बांध से आसपास के करीब 8 से 10 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती है। ऐसे में बांध की पार में लगातार हो रहा रिसाव किसानों की खड़ी फसलों और ग्रामीण आबादी के लिए खतरा बन सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तथा बांध की पार पर पानी का दबाव बढ़ा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
इधर, रिसाव वाले हिस्से की स्थिति को देखते हुए बांध के उलट की ओर जेसीबी से उभरी हुई सतह को समतल कर ढलान बनाने का कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक जलभराव की स्थिति में पानी सुरक्षित रूप से बाहर निकल सके। बताया जा रहा है कि करीब 17 फीट जलस्तर पहुंचने के बाद बांध उलट होने की स्थिति में आ जाता है। जिस हिस्से में रिसाव हो रहा है, वहां पानी की गहराई और दबाव अधिक बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बांध की मरम्मत कार्य की तकनीकी जांच और गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी बड़े हादसे से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।