PM-JANMAN सड़क निर्माण में ठेकेदार श्याम तम्बोली पर सवालों की बौछार, स्थानीय नदी की रेत से पुल-पुलिया निर्माण, गुणवत्ता पर गंभीर संदेह!

कवर्धा :- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PM-JANMAN) के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान में चयनित PVTG बसाहट को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सड़क अब विवादों के घेरे में आ गई है।

पैकेज क्रमांक CG-09-142 (जनमन) के तहत कुल्हीडोगरी मेन रोड से पिपरहा तक 10.00 कि.मी. लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित निर्माण राशि 498.10 लाख रुपये तथा 05 वर्ष के संधारण हेतु 47.20 लाख रुपये स्वीकृत हैं।

कार्य का प्रारंभ दिनांक 06.12.2024 बताया गया है, जबकि संधारण अवधि 06.12.2025 से 05.12.2030 निर्धारित है। यह परियोजना ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तीय रूप से पोषित है और परियोजना क्रियान्वयन इकाई, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, कवर्धा (जिला कबीरधाम) द्वारा निष्पादित की जा रही है।
निर्माण कार्य के ठेकेदार हैं श्याम तम्बोली, कवर्धा।
स्थानीय नदी की रेत से निर्माण, नियमों की अनदेखी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उक्त सड़क पर बनाए जा रहे पुल-पुलियों में स्थानीय नदी की रेत का उपयोग किया जा रहा है। यह रेत बिना समुचित परीक्षण और स्वीकृति के उपयोग में लाई जा रही है, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

मुनगाडीह में आंगनवाड़ी के सामने पाइप पुलिया, मिट्टी युक्त रेत का डंप
सड़क का अंतिम छोर मुनगाडीह है, जहां आंगनवाड़ी केंद्र के ठीक सामने पाइप पुलिया का निर्माण प्रस्तावित है। यहीं पर मिट्टी युक्त रेत डंप कर उपयोग की तैयारी की गई है। 

ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी सामग्री से बना ढांचा दीर्घकाल में कमजोर साबित हो सकता है, जिससे बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर सीधा खतरा उत्पन्न होता है।

तकनीकी निगरानी कमजोर, भरोसे को किया जा रहा दरकिनार

कार्य क्षेत्र में निर्माण कार्य अधिक होने का हवाला देकर तकनीकी अधिकारियों की फील्ड में नियमित मौजूदगी नहीं हो पा रही है। इसी का फायदा उठाकर गुणवत्ता नियंत्रण और मानकों को दरकिनार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जितना भी निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह जांच के दायरे में आना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर सवाल - 
PM-JANMAN जैसी राष्ट्रीय महत्व की योजना का उद्देश्य आदिवासी और PVTG बसाहटों को सुरक्षित, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़क सुविधा देना है। लेकिन यदि निर्माण में अनियमितताएं हुईं, तो यह न केवल जनता के भरोसे बल्कि सरकारी धन के सदुपयोग पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

मांग - 
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि
निर्माण सामग्री की तत्काल तकनीकी जांच हो,
पुल-पुलिया कार्य की स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट कराई जाए,
और ठेकेदार श्याम तम्बोली सहित संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

अब देखना यह है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है, या फिर यह राष्ट्रीय योजना भी स्थानीय लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी।

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