कवर्धा :- उप वन मंडल पंडरिया के पूर्व परिक्षेत्र अंतर्गत मुनगाडीह के समीप हरे-भरे सागौन के पेड़ों की लगातार कटाई ने वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थिति यह है कि मुख्य सड़क के किनारे खुलेआम सागौन काटे जा रहे हैं, जिससे यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब यह हाल सार्वजनिक मार्गों का है, तो बीहड़ और अंदरूनी जंगलों की स्थिति कैसी होगी।
वन मंडल पंडरिया पहले से ही अवैध लकड़ी कटाई और वन्यजीव शिकार के मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर नियंत्रण के ठोस संकेत नहीं दिखते। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार नियमित गश्त की भारी कमी है, जिससे लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि कई अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करते, जिससे निगरानी और त्वरित कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित रह गई है। दूसरी ओर, विभाग अपने मूल उद्देश्य—वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा—को पीछे छोड़कर निर्माण कार्यों पर अधिक ध्यान देता नजर आ रहा है, जबकि जंगल लगातार कटते जा रहे हैं।
मुनगाडीह की यह घटना केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पंडरिया वन मंडल की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। यदि सड़क किनारे सागौन सुरक्षित नहीं हैं, तो अंदरूनी जंगलों में हरियाली किस हाल में होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
अब सवाल साफ है—
जब जंगल कट रहा था, तब जिम्मेदार आखिर कर क्या रहे थे
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