कवर्धा :- प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के तहत प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना (PM-JANMAN) के अंतर्गत बैरख रानीदहरा से नवाटोला तक बनने वाली 1 किलोमीटर लंबी सड़क में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ₹76.37 लाख की लागत से बन रही इस सड़क का आधा हिस्सा BT और आधा हिस्सा CC के रूप में स्वीकृत किया गया था। परियोजना में 4 पुलिया भी शामिल हैं।
मौके पर निरीक्षण के दौरान सड़क और पुलिया निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग स्पष्ट रूप से देखा गया। निर्माण में लगाई जा रही गिट्टी घुलयुक्त पाई गई, जो पानी और दबाव के संपर्क में आते ही टूटने संभावना है। ग्रामीणों के अनुसार ऐसी गिट्टी का उपयोग पुलिया तथा सड़क दोनों की संरचनात्मक मजबूती को गंभीर रूप से कमजोर करता है।
मिट्टीयुक्त मुरूम से सड़क निर्माण, रॉयल्टी चोरी का बड़ा संदेह
सड़क निर्माण में प्रयुक्त मुरूम में मिट्टी की अत्यधिक मात्रा पाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुरूम अक्सर अवैध स्रोतों से लाई जाती है, जिससे रॉयल्टी और राजस्व की हानि की आशंका बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तय मानकों के अनुरूप प्रोसेस्ड मुरूम की जगह सस्ती और मिट्टीदार सामग्री मिलाकर सड़क बनाई जा रही है।
सामग्री की मात्रा में भारी अंतर—249 ट्रक स्वीकृत, 72 ट्रक उपयोग दिखाए
बीटी सड़क निर्माण के लिए
2993.71 घन मीटर (लगभग 249 ट्रक) सामग्री स्वीकृत थी,
जबकि
मात्र 875.83 घन मीटर (लगभग 72 ट्रक) सामग्री उपयोग में लाए जाने का दावा किया गया है।
इसके अतिरिक्त ग्रेवल की मात्रा भी वास्तविक आवश्यकता से कम पाई गई। इससे कागजों में अधिक सामग्री दिखाकर बिलिंग बढ़ाने की आशंका मजबूत होती है।
परियोजना का विवरण -
योजना: प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना (PM-JANMAN)
अभियान: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान
लाभान्वित बस्ती: PVTG – नवाटोला, कुल जनसंख्या 278
पैकेज: CG09145
लंबाई: 1.00 किमी (BT 0.50, CC 0.50)
ठेकेदार: तिलक राम चंद्रवंशी, कवर्धा
कार्य प्रारंभ: 18 जनवरी 2025
कार्य अवधि: 12 माह (वर्षा ऋतु सहित)
संधारण अवधि: 5 वर्ष
वित्तपोषण: ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार
स्थानीयों ने उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य PVTG समुदाय तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पहुंचाना था, लेकिन घटिया सामग्री और निगरानी की कमी के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।
उच्चस्तरीय जांच,
गुणवत्ताहीन निर्माण हटाकर पुनः कार्य, और
जिम्मेदार अधिकारियों–ठेकेदार पर कार्रवाई
की मांग जोर पकड़ रही है।
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