कवर्धा/ भोरमदेव महोत्सव 2024 : ऊंचे विशाल श्रृंखला सतपुड़ा पर्वत की मैकल पहाड़ी से घिरे सुरमयवाद कला संस्कृति में स्थिति ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के प्रांगण में वर्षों से आयोजित चले आ रहे।भोरमदेव महोत्सव की परंपरा को कायम रखने जिला प्रशासन द्वारा दो दिवसीय भोरमदेव महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दीप प्रज्जवलित कर मंत्रोचार के साथ भोलेनाथ ( बाबा भोरमदेव ) की पूजा अर्चना कर विधिवत शुभारंभ किया गया।।
जिला कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे सहित जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल,अपर कलेक्टर श्री अविनाश भोई एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर दो दिवसीय भोरमदेव महोत्सव का विधिवत मेल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर दूर दराज से आए श्रद्धालूगण उपस्थित थे।
*भोरमदेव महोत्सव के दूसरे दिन का कार्यक्रम जिसमे अनेक कलाकार अपनी कला का अंदाज देंगे*
इसके पहले आज प्रातः काल बाबा भोरमदेव का महाभिषेक, एक हजार नामों से सहर्षाचन, रूद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार आरती किया गया। भोरमदेव महोत्सव के पहले दिन बैगा नृत्य, फाग गीत, छत्तीसगढ़ी लोककला के साथ स्कूली बच्चों ने छत्तीसगढ़ की लोक-पारंम्परिक लोकगीत गाने के साथ कबीरधाम जिले में आयोजित भोरमदेव महोत्सव वर्ष 2024 के सांस्कृतिक का रंगारंग प्रस्तुति हुई।
बच्चों ने सामुहिक नृत्य के साथ बोड़ला के रजउ साहू छत्तीसगढ़ की लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रभुराम धुर्वे की टीम ने फाग गीत की प्रस्तुति । इसके बाद सरगम ग्रुप की प्रस्तुति देंगे। छत्तीसढ़ी लोकगीतों के गायन की प्रस्तुति देते हुए श्री गुरूदास मानिकपुरी ने अपने चीर परचीत अंदाज में छत्तीसगढ़ की संस्कृति सहित सुपर डुपर गानों की शानदार प्रस्तुति देकर महोत्सव का मान बढ़ाएंगे।
प्रत्येक वर्ष तेरस और चौदस की तिथि बाबा भोरमदेव के लिए विशेष महत्व*
भोरमदेव मंदिर के पुजारी ने बताया कि भोरमेदव मंदिर में प्रत्येक वर्ष होली के बाद तेरस और चौदस को बाबा भोरमदेव शिव जी के लिए विशेष दिन रहता है। प्राचीन काल से तेरस के दिन मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान और दिव्य श्रृंगार सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है । यहां प्राचीन काल से मंदिर के समीप स्थानीय मेला का आयोजन भी होते आ रहे है जिसमे अनेक दूर दराज के श्रद्धालु भी दर्शन के लिए पहुंचते है, जो समय के साथ-साथ स्थानीय मेला अब महोत्सव का स्वरूप ले लिया है।
छत्तीसगढ़ कबीरधाम की ऐतिहासिक, पुरात्तविक, धार्मिक, पर्यटन और जन आस्था का केन्द्र के नाम से प्रत्येक वर्ष यह आयोजन होते आ रहा है। यह 28 वां भोरमदेव महोत्सव है
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक, पुरातात्विक, पर्यटन और जन आस्था के रूप में ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। इस मंदिर की ख्याति देश के अलग-अलग राज्यों तक फैली हुई है। यहां साल भर विदेशी, देशी तथा घरेलु पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं के रूप में आना होता है। बाबा भोरमदेव मंदिर में प्रत्येक वर्ष होली के बाद कृष्णपक्ष के तेरस और चौदस को महोत्सव मानाने की यहां परम्परा रही है। साथ में सावन मास में मंदिर में विशेष पूजा अर्चना भी की जाती है। यहां सावन माह में मेले का आयोजन भी होता है। जिसमें देशी तथा घरेलु पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं के रूप में शामिल होते है। इस दौरान ऐतिहासिक महत्व स्थल भोरमदेव मंदिर की भव्यता और उसके महत्व को बनाए रखने के लिए किए जा रहे ।।
पोस्टेड : उमेश कुमार