कवर्धा। कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र में धान खरीदी व्यवस्था में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की संयुक्त जांच टीम द्वारा 18 जून 2026 को किए गए औचक भौतिक सत्यापन में बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच में तीनों केंद्रों से कुल 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 नग खाली बारदाने गायब पाए गए। इससे शासन को ₹81 लाख 19 हजार 502 की आर्थिक क्षति होने का अनुमान लगाया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार बासिनझोरी केंद्र में 585.98 क्विंटल धान एवं 4,130 बारदाने, बिरनपुर कला में 1,032.36 क्विंटल धान एवं 5,777 बारदाने तथा सहसपुर लोहारा केंद्र में 823.58 क्विंटल धान एवं 12,075 बारदाने की कमी दर्ज की गई।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तीनों उपार्जन केंद्रों का संचालन समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी के अधीन था। बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा केंद्रों में वे प्रबंधक के साथ-साथ खरीदी प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। जांच में आरोप है कि उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटरों और फड़ प्रभारियों के साथ मिलकर धान खरीदी एवं भंडारण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं।
भौतिक सत्यापन के दौरान सैकड़ों तौल पत्रकों में केवल किसानों के हस्ताक्षर मिले, जबकि खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौलकों के हस्ताक्षर वाले कॉलम खाली पाए गए। जांच दल का मानना है कि जिम्मेदारी तय होने से बचने के उद्देश्य से आवश्यक हस्ताक्षर जानबूझकर नहीं किए गए।
मामले में पुलिस ने गंगादास मानिकपुरी, बलदाऊ डड़सेना, बिहारी राम साहू, तुकाराम साहू, पीलूराम साहू तथा महावीर साहू सहित छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(5) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में अभी भी करीब 54 हजार क्विंटल धान गायब बताया जा रहा है। ऐसे में धान खरीदी व्यवस्था की निगरानी करने वाले समिति, सहकारिता और संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी और उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी, यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है।
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