सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरिया भगवान भरोसे घंटो तक इंतजार करता रहा मरीज, रात में डॉक्टर, नर्स रहे ड्यूटी से गायब

पंडरिया ( उमेश कुमार ) : सोमवार की रात पंडरिया स्थित एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज के द्वारा अपनी इलाज करवाने जाया जाता जहा पर प्राइवेट सेक्टर से आए निविदा सुरक्षा कर्मी के भरोसे पूरी हॉस्पिटल संचालित होती नजर आ रही थी।

पंडरिया निवासी तिरंगा टंडन को कुत्ते ने काट लिया था जिसके वजह से घायल होकर तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरिया गया जहां पर डॉक्टर, स्टाफ नर्स और न ही वार्ड बॉय थे।
वहां पर मौजूद रहे सुरक्षा कर्मी को डॉक्टरों के उपस्थिति को लेकर इलाज कराने संबंधित जानकारी लेना चाहा गया मगर उनके द्वारा अपने शब्दों में मरीज को नजरंदाज करते हुए भगा दिया गया।

मायूस मरीज अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हो उठा वहीं उसको अपने उपचार के लिए अन्य प्राइवेट सेक्टर क्लिनिक का सहारा लेना पड़ा जहां उसे आर्थिक रूप से इलाज के दौरान हानि हुई जो आम जनों की आर्थिक और मानसिक तथा शारीरिक रूप से शासन के योजना तथा अपने अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है जो चिंता का विषय है और शासन तथा प्रशासन पर सवालिया बन रही है।

लगातार इस तरह की समस्याएं इस समय कुछ महीनों से देखने को मिल रहा है जो काफी हद तक प्रशासनिक तथा वर्तमान राजनैतिक दलों को भी प्रभिवित करती नजर आ रही है आखिर क्यों नहीं हो पा रहा है स्वास्थ्य व्यस्था में सुधार क्या हो गया पंडरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कभी डॉक्टर नहीं तो कभी नर्स नही अगर साफ सफाई की बात करें हॉस्पिटल के इर्द गिर्द गंदगी की आलम देखा जा सकता है, यह स्पष्ट नजर आ रही है कि स्वच्छता में भी कोताही बरती जा रही है।

खण्ड चिकित्सा अधिकारी को बदलने की आवश्यकता 
पिछले समय में खण्ड चिकित्सा अधिकारी के कार्यकाल काफी सराहनीय रही व्यवस्था में सुधार, स्वच्छता में सुधार साथ ही साथ इस हॉस्पिटल में प्राइवेट सेक्टर के हॉस्पिटलों के समान ड्यूटी में अपनी उपस्थिति सभी हॉस्पिटल के स्टाफ मौजूद रहते थे। हालाकि राजनैतिक दलों कर्मचारियों की ओर से कुछ सवालिया उठी जो बे बुनियाद रही। उस समय की कार्यकाल अवधि में किसी भी समय इलाज कराने मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पंडरिया पहुंचते तत्काल उनको स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती लेकिन अब की स्थिति में बद से बदतर हालात नजर आ रही है।

कैसे होगा इस तरह से अपने दायित्व का निर्वहन न कर सकने वाले अधिकारी कर्मचारी के ऊपर कार्यवाही, आखिर कौन और कब कसेगा शिकंजा, इस तरह की आम जनों को समस्याओं में डालने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के ऊपर। आखिर तिरंगा जैसे कितने मरीज अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित होकर इधर उधर भटकते रहेगें क्या आर्थिक रूप से प्रशासन के कर्मचारी अथवा प्रशासन उनकी सहयोग कर पाएंगे शासकीय अस्पताल में इलाज न होने पर निजी क्लीनिक में इलाज कराने मजबूर हुए।

पोस्टेड : उमेश कुमार 

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